आज इंसान पूरे दुनियाँ में सुःख की खोज कर रहा हैं | हर किसी का तरीका अलग अलग हो सकता हैं लेकिन आख़िर कार खोज उसकी सुःख कि ही हैं | इस खोज को बढ़े ध्यान से देखें तो दिखेगा की इंसान सूख की ख़ोज इसलिए कर रहा हैं क्यों की वो बड़ा दुःखी हैं और उसमें यह हिम्मत नहीं हैं की वो इसको किसीको कह सके | तो वो अलग अलग तरीकों से फ़िर सुःख की खोज करता हैं | कोई पैसों में , कोई दोस्तों में , कोई बड़े घरों में , कोई फिल्मों में ,कोई खाने में ,कोई सोने में,कोई खेल में ,कोई नाच गानों में , कोई शराब पिके के अपना सुःख खोजतें हैं | इसको देखें तो हम पाएंगे की हम सुःख नहीं खोज रहे लेकिन हम अपने आपको बेहोश कर रहे हैं | हमें सुःख नहीं बेहोशी चाहिए | क्यों की हम बेहोश हैं हम यह नहीं देख रहे जो हमें सुख दे रहा हैं उससे हमें उसकी आदत भी हो रही हैं और यही आदत कल हमें दुःख देगी |
तो अब करें तो क्या करे | करना कुछ नहीं हैं बस हमें देखना हैं की हमें दुःख दे कौन रहा हैं | जीवन मैं ऐसा कोनसा कारण हैं याह बंधन हैं जो मुझे दुःख दे रहा उसे खोजें और उससे मुक्त हो जाओ | यही सही तरीका हैं | इससे ही सच्ची सुख़ की प्राप्ति होगी |
"Don't search happiness, just find the source of misery"
Comments
Post a Comment